नाथ ग्रंथ भंडार

वापसी और धन-वापसी

ग्रंथ लौटाए नहीं जाते — सिवाय उस हालत के जब ग़लती हमारी हो। नीचे वही तीन हालात, और उनमें क्या होता है।

अंतिम बार बदला गया: 2026-08-26


सामान्यतः वापसी नहीं ली जाती

यह किताबों की दुकान है। मन बदल जाने, दूसरी जगह सस्ता मिल जाने या ग्रंथ पसंद न आने पर वापसी नहीं ली जाती — लौटा हुआ ग्रंथ दोबारा नए जैसा नहीं रह जाता। इसीलिए हर पन्ने पर पृष्ठ-संख्या, लेखक, प्रकाशक और ब्योरा पहले ही खुलकर दिया जाता है, ताकि मँगाने से पहले पूरी बात साफ़ हो।

इसका एक ही अपवाद है: ग़लती हमारी हो। ऐसा हुआ तो पार्सल मिलने के सात दिन के भीतर बता दीजिए —

  • वस्तु टूटी, फटी या ख़राब पहुँची हो।
  • जो मँगवाया था वह नहीं, कुछ और आया हो।
  • पार्सल में कोई वस्तु कम हो।

ये तीन हालात क़ानूनन भी वापसी के दायरे में आते हैं (उपभोक्ता संरक्षण ई-कॉमर्स नियम, 2020), और इनमें दुकान मना नहीं करती।

एक सलाह जो बहुत काम आती है

पार्सल खोलते समय एक वीडियो बना लीजिए, जिसमें बंद पार्सल से लेकर खोलने तक सब एक ही बार में दिखे। कुछ ग़लत निकलने पर यही सबसे तेज़ रास्ता बन जाता है — न कुछ साबित करना पड़ता है, न इंतज़ार।

कैसे बताएँ

नीचे दिए ई-मेल या WhatsApp पर लिखिए, और साथ में यह भेजिए: ऑर्डर नंबर, वस्तु का नाम, और जो गड़बड़ है उसका चित्र।

दो कार्य-दिवस के भीतर जवाब मिल जाएगा — वस्तु वापस मँगवानी है या नहीं, यह उसी में बता दिया जाएगा। वापसी का डिलीवरी शुल्क दुकान देगी, आपसे नहीं लिया जाएगा।

पैसा कब लौटता है

  • वापसी मंज़ूर होते ही धन-वापसी उसी रास्ते से शुरू कर दी जाती है जिससे भुगतान आया था।
  • बैंक तक पहुँचने में सामान्यतः पाँच से सात कार्य-दिवस लगते हैं — यह समय बैंक का है, दुकान का नहीं।
  • डिलीवरी का शुल्क भी लौटाया जाता है, बशर्ते गड़बड़ी दुकान की तरफ़ से हुई हो।

ऑर्डर रद्द करना

पार्सल भेजे जाने से पहले ऑर्डर रद्द कराया जा सकता है — पूरा पैसा लौट आता है। भेजा जा चुका पार्सल रद्द नहीं होता; वह मिलने पर ऊपर वाली शर्तें लागू होंगी।