श्री नाथ सिद्ध पाठ
इस ग्रंथ में क्या है
नित्य पाठ की पूरी अनुक्रमणिका — गुरु-शिष्य परंपरा और नवनाथ प्रणाली से लेकर चौरासी सिद्धों, बारह पंथों, शाबर मंत्रों, आरती और भजनों तक।
मनोगत
यूँ तो दुनियाँ में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, तंत्र-मंत्र, उपासना आदि बड़ी-बड़ी उपलब्धियाँ परमात्मा प्राप्ति के लिये हैं — जो जनसाधारण व्यक्ति आज के व्यस्त जीवन में कर नहीं पाता। अत: कलियुग में मात्र नाम पाठ करने पर इष्ट की प्राप्ति होने का सुलभ सुगम उपाय बताया गया है, जिसे नाथ संप्रदाय भी स्वीकार करता है।
इस «श्री नाथ सिद्ध पाठ» में अनुक्रमे नाथ सिद्ध पाठ, नाथ सिद्ध गुरु-शिष्य परम्परा, नवनाथ सृष्टी प्रादुर्भाव, आगे-आगे गोरख जागे — यह पाठ विधियाँ नाम-संकीर्तन के उद्देश्य से निर्माण की गयी हैं। उसी प्रकार इसमें «गोरक्ष शाबर तंत्र» और «बुद्धिदाता शाबर मंत्र», भजन, आरती इत्यादि का सामावेश करते हुये हमारे नाथ सम्प्रदाय की परम्परा कि संस्कृति को उजागर करने का प्रयास किया है।
— योगी विलासनाथ
अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा, हरिद्वार
अनुक्रमणिका
भीतर की उपसूचियाँ भी वैसी ही रखी हैं जैसी ग्रंथ में छपी हैं।
| क्रमांक | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| 1 | श्री नाथ सिद्ध पाठ (नित्य पाठ) | 8 |
| 2 | श्री नाथ सिद्धों की गुरु-शिष्य परंपरा (नित्य पाठ) | 25 |
| गुरु वन्दना | 25 | |
| नवनाथ प्रणाली | 28 | |
| चौरासी सिद्धों की नाथ प्रणाली | 33 | |
| बारह पंथों की परंपरा | 41 | |
| पंथ आई की परंपरा | 44 | |
| कृपा दान | 51 | |
| 3 | श्री नवनाथ सृष्टी का प्रादुर्भाव (नित्य पाठ) | 54 |
| नवनाथ शाबर मंत्र | 62 | |
| 4 | आगे-आगे गोरख जागे (नित्य पाठ) | 64 |
| 5 | श्री गोरक्ष सिद्ध शाबर तंत्र (संकट मोचन तथा इच्छा कार्य पूर्ति) | 72 |
| 6 | बुद्धिदाता शाबर मंत्र (विद्या ज्ञान, स्मरण शक्ति आदि की प्राप्ति हेतु) | 77 |
| 7 | «आरती» गुरु गोरक्षनाथ जी की | 80 |
| 8 | सतगुरु परिक्रमा | 82 |
| 9 | सतगुरु प्रार्थना | 84 |
| 10 | संत महिमा (भजन) | 85 |
| 11 | शब्द विलास | 87 |
| «आज भी है» | 87 | |
| «भी तो नही है» | 88 | |
| «अंतरात्मा» | 89 | |
| 12 | पाठ विधि | 90 |
| 13 | सूचि पत्र | 92 |